महाकाल का एक और रहस्य खुदाई में मिला है ये महाकाल का मंदिर

उज्जैन देवास यात्रा की श्रंखला की पिछली कड़ी में मैंने आपको देवास में स्थित कैला माता मंदिर, तुलजा भवानी तथा चामुंडा माता टेकरी के बारे में बताया था. आइये अब इस कड़ी में हम चलते हैं महातीर्थ उज्जैन तथा जानते हैं महाकाल की महिमा के बारे में और करते हैं दर्शन महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के सर्वप्रथम भगवान् महाकाल के श्री चरणों में मेरा कोटि कोटि वंदन.

उज्जैन के बारे में: उज्जैन मध्य प्रदेश के मालवा क्षेत्र में स्थित एक प्राचीन नगर है जो की क्षिप्रा नदी के पूर्वी किनारे पर स्थित है. प्राचीन समय में इसे उज्जयिनी कहा जाता था. जैसा की महाभारत ग्रन्थ में वर्णित है उज्जयिनिं नगर अवन्ती राज्य की राजधानी था. उज्जैन हिन्दू धर्म की सात पवित्र तथा मोक्षदायिनी नगरियों में से एक है (अन्य छः मोक्षदायिनी नगरियाँ हैं – अयोध्या, वाराणसी, मथुरा, हरिद्वार, द्वारका एवं कांचीपुरम). यहाँ हिन्दुओं का पवित्र उत्सव कुम्भ मेला 12 वर्षों में एक बार लगता है.

उज्जयिनी, शिक्षा का एक प्राचीन स्थल भी था जहाँ गुरुकुलों में कला एवं विज्ञान तथा वेदों का ज्ञान दिया जाता था. भगवान् श्री कृष्ण ने अपने भ्राता बलराम तथा सखा सुदामा के साथ यहाँ के संदीपनी आश्रम गुरुकुल में अध्ययन किया था. यह हिन्दू समय-निर्धारण का केंद्र भी है. उत्तर में 23 डिग्री 11 मिनट तथा पूर्व में 73 डिग्री 45 मिनट पर स्थित होने के कारण हिन्दू खगोलीय ग्रन्थ के अनुसार मुख्य भूमध्य रेखा अथवा शुन्य देशांतर रेखा उज्जैन से गुजरती है, इसलिए समय की गणना उज्जैन में सूर्योदय के द्वारा की जाती है और तदनुसार, कैलेण्डर वर्ष के आरंभ ‘मकर संक्रांति’ तथा युग के प्रारंभ की गणना इससे की जाती है.
यहीं पर भगवान् शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक तथा अति पावन श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग विद्यमान है. इस नगरी का पौराणिक तथा धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व सर्वज्ञात है. जहाँ महाकाल स्थित है वहीँ पर प्रथ्वी का नाभि स्थान है, बताया जाता है की वही धरा का केंद्र है. उज्जैन की पावन धरा पर ही माँ शक्ति के 51 शक्तिपीठों में से एक मां हरसिद्धि का मंदिर भी स्थित है.
सामान्य तौर पर एक नगर के लिए मंदिर बनाया जाता है लेकिन मंदिरों की वजह से नगर का बसाया जाना विरल ही होता है लेकिन उज्जैन में मंदिरों की संख्या को देखते हुए यही कहा जा सकता है की इस नगर को मंदिरों के लिए ही बसाया गया है. यहाँ के सैकड़ों मंदिरों की स्वर्ण चोटियों को देखकर इस नगर को प्राचीन समय में स्वर्नश्रंगा भी कहा जाता था.
मोक्षदायक सप्तपुरियों में से एक इस उज्जैन नगर में 7 सागर तीर्थ, 28 तीर्थ, 84 सिद्धलिंग, 30 शिवलिंग, अष्ट (8)भैरव, एकादश (11) रुद्रस्थान, सैकड़ों देवताओं के मंदिर, जलकुंड तथा स्मारक है. ऐसा प्रतीत होता है की 33 करोड़ देवी देवताओं की इन्द्रपुरी इस उज्जैन नगर में बसी हुई है.

नाभिदेशो महाकाल्स्त्नामना तत्र वै हर – वराह पुराण के इस वर्णन के अतिरिक्त अन्य पुराणों, ग्रंथों, शास्त्रों में भी उज्जैन के धार्मिक महत्व का वर्णन है. समस्त मृत्युलोक के स्वामी और काल गणना के अधिपति श्री महाकालेश्वर का निवास स्थान होने की वजह इस तीर्थ का महत्व औरों से अधिक है.