क्या सीता रावण की पुत्री थी ? रहस्य जान रह जाएंगे हैरान

राम जी के जीवन पर आधारित कहि रामायण लिखी जा चुकी है जिसमे सीता और रावण के संबंध को लेकर कहि कथन भी प्रचलित है जिनमे से एक है अदभुत रामायण | रामायण के कई राज की खोज आज भी एक जारी है जिनमे से एक रावण और सीता का संबध का है कहि विद्वानों का कहना है की रावण और सीता का सम्बन्ध पिता और पुत्री का है लेकिन रामायण वाल्मीकि जो के रामायण की सबसे बड़ी ग्रन्थ में से एक है उसमे इस विषय का जिक्र नहीं किया हुआ है तो आईये जानते है इस शोध के बारे में

दो ऋषि मुनियो के बीच वातालाप में यह ये बात सामने आई के रावण ने एक बार कहा था की अगर मैं अपनी पुत्री को स्वीकार करूंगा तो मेरा सर्वनाश हो जायेगा रामायण में यह बताया गया है की सीता जी का जन्म मंदोदरी के गर्भ से हुआ था |

दभुत रामायण में बताया गया है एक बार की बात है दण्डकारण्य में गृत्स्मद नामक ब्राह्मण, एक कलश में मंत्रोच्चारण के साथ दूध की बूंदे जमा करता था वे ऐसा ऐसा इसलिए करता था क्यों वे चाहता था की लक्समी जी उसे उनकी पुत्री में रूप में प्रयाप्त हो / एक दिन उसकी अनुपस्थिति में रावण वह आपहोचा और उसने ऋषियों के रक्त को उस कलश में डालकर लंका ले गया | कलश को उसने मंदोदरी को सौंप दिया और कहा इस कलश में तीक्ष्ण विष है इसके सावधानी से रखे |

फिर एक दिन रावण वन विहार को चला गया काफी समय तक न लूटने पर परेशान मंदोदरी ने आत्म हत्या का निर्णय लिया और कलश में जहर समाज कर पी गयी जिसके कारन अनजाने में मदोदरी गर्भवती हो गयी और सोच में पर गयी की अगर मेरे पति को पता चल गया तो वे समझेंगे के मेरे संबंध किसी पुरूष के साथ है ऐसी कारण रावण की अनुपस्तिथि में मंदोदरी तीर्थ यात्रा पर कुरुक्षेत्र जा पहोची और वह भूमि में उसने भ्रूण की धरती में दफना दिया और उसने सरस्वती नदी में स्नान करके लंका वापिस लोट आयी | धरती में गढ़ा हुआ यही भ्रूण पूर्णतया कुशल
सीता के रूप में प्रकट हुआ वही एक दिन हल चलते समय मिथिला के राजा चणक को प्राप्त हुआ

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