शनि के अशुभ प्रभाव से बचने के लिए उपाय

शनि

शनि ग्रह को न्यायदिश की उपाधि से नवाजा गया है इसका कारक घर है राहु , बुध ,शुक्र इसके मित्र और सूर्ये , चंद्र, मंगल, इसके शत्रु ग्रह है बृहस्पति और केतु इसके शूम सम है
1 , 4 , 5 , 6 वे घर में शनि बैठा हो तो वह अशुभ फल देता है 7 , 8 ,9 , और 12 वे घर में यह शुभ होता है शनि जब अशुभ होता है तो व्यापार जमीं जायजाद में हानि देता है अशुभ शनि के प्रभाव से जोड़ो में दर्द तथा कन्याओ के विवाह में विलम्भ होता है

शनि के अशुभ प्रभाव से बचने के लिए उपाय

1.शनि वॉर के दिन व्रत रखे तेल है दीपक सुबह शाम जलाए/
2.कांसे की कटोरी में तेल भर कर उसमे अपनी परछाई देख कर दान करें
3.शनिवार के दिन सरसो के तेल में कील डालकर दान करें तथा पीपल की जड़ में तेल चढ़ाएं
4.उरद की दाल भोजन में न खाएं /
5.पुराने लोहे का छल्ला अथवा कढ़ा धारण करें
6.तेल का परांठा बनाकर उस पर कोई मीठा पदार्थ रखकर गाये के बछड़े को खिलाएं/

राहु

यह एक नपुंसक तथा उग्र स्वभाव वाला एंव शत्रुकारी ग्रह है इसको फ़ारसी में “रास ” तथा अंग्रेजी में (dragon head )
कहते है इसका वॉर बृहस्पति तथा रंग नीला है केतु , शनि,बुध इसके मित्र है तथा मंगल सूर्ये ब्रस्पति इसके शत्रु है चंदमा इसका सम ग्रह है जनम कुंडली में 3 , 4 , 6 , घरो में शुभ फलदायक रहता है
राहु शत्रुता के कारण की केतु पर बुरा प्रभाव दालता है अन्यथा वह किसी भी घर में अशुभ प्रभाव नहीं डालता राहु के अशुभ होने पर घर में चोरी हो सकती है तथा माकन घिर सकता है

सिर के बाल सफ़ेद हो जाते है झूठे आरोप लगते है कारोबार बंद हो जाता है तथा शत्रु भी नुकसान पहुंचते है

“राहु के अशुभ प्रभाव से बचने के उपाय” /

1.एकादशी को व्रत रखे तुलसी या पीपल की जड़ में जल चढ़ाये /
2.चावल तथा जोह है दान करे ,खीर का भोजन कन्याओ को खिलाएं /
3.लक्समी का पूजन करे ,सूखे मेवे का भोग लगाए /
4.किसी कन्या के विवाह में कम से कम पांच बर्तन दान करे
5.चंडी की अंगूठी या लोकित धारण करे

केतु

केतु एक नपुंसक ग्रह है किन्तु पापी होते हुए भी फल प्रदान करता है इसको अंग्रेजी में “dragonis tail ” भी कहते है तथा फ़ारसी में तुम्भ कहता इसका प्रतिक काली गाये , चितकबरी पंच वाला कुत्ता है
केतु रहो के इशारे पर तथा उसके बनाये रादस्ते पर चलता है केतु की चाल राहु की तरह उलटी की होती है केतु के अशुभ होने पर जातक के बाल झरने लगते है खासी नज़ला और सर के कुछ भाग में पीरा रहती है घर में कन्या का जन्म होता है

“केतु के अशुभ प्रभाव से बचने के उपाय”

1.त्रेवदशी का व्रत रखे भैरव जी की उपासना करे केले के पत्ते पर चावल परोस कर भोग लगाएं
2.गाये के घी का दीपक प्रति दिन शाम को जलाये
3.हरा रुमाल अपने साथ रखे ,सुबह शाम माता पिता के चरण छुए
4.तिल के बने लाडू सिहागणो को खिलाये कन्याओ को रविवार के दिन मीठा , दही खिलाये
5.बर्फी के चार टोकरे पानी बहाये,अपनी बात गुप्त रखे
6.पूर्णिमा के दिन खीर बनाकर रात्रि में रखे,सुबह इस खीर का कुछ भाग गाये को तथा कुछ भाग कन्याओ को खिलाये फिर स्वय भी ग्रहण करे

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